नोटिस पीरियड वह टाइम होता है जो इस्तीफा देने के बाद हर कर्मचारी को कंपनी में बिताना पड़ता है। ज्वॉइनिंग के वक्त मिलने वाले ऑफर लैटर में इसके बारे में विस्तार से लिखा होता है। कई बार जब कोई अच्छी नौकरी का अवसर मिलता है तो नोटिस पीरियड का चक्कर आड़े आता है। ऐसे में आप कुछ तरीके अपनाकर कर सकते हैं अपने नोटिस पीरियड को कम।
डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपने किसी कंपनी में इंटरव्यू दिया और वहां आपका सेलेक्शन भी हो गया। टाइमिंग से लेकर वहां का माहौल, सैलेरी सब आपके मनमुताबिक है, लेकिन आपको वहां जल्द से जल्द ज्वॉइन करना है। ऐसे में सबसे बड़ी मुसीबत होती है वर्तमान कंपनी में नोटिस पीरियड सर्व करना। नोटिस पीरियड को लेकर हर कंपनी की अलग-अलग पॉलिसी होती है। जहां कुछ कंपनी में ये पीरियड 15 दिनों का होता है, तो वहीं कहीं-कहीं 2 से 3 महीने का।
क्या होता है नोटिस पीरियड?
हर कंपनी अपने कर्मचारी के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करती है, जिसमें ज्वॉइन से लेकर नोटिस पीरियड हर एक की डिटेल होती है। नोटिस पीरियड उस टाइम को कहा जाता है, जो कर्मचारी इस्तीफा देने के बाद कंपनी में गुजारता है। उस दौरान उसे अपने सभी जरूरी प्रोजेक्ट पूरे करने होते हैं, अपने काम रिस्पॉन्सिबल व्यक्ति को हैंडोवर या सिखाने होते हैं। इसके बाद ही कर्मचारी फ्री होता है। कई बार एम्प्लाई रिजाइन करने के बाद नोटिस पीरियड सर्व करने की स्थिति में नहीं होता है। ऐसे में आप कंपनी के साथ नोटिस पीरियड को लेकर नेगोशिएट भी कर सकते हैं, लेकिन इन बातों का रखना होगा ध्यान।

