Amount of short articles:
Amount of articles links:
You can order sections with dragging on list bellow:
ऑस्ट्रेलिया में प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी से निपटने के लिए करीब 30,000 से ज्यादा प्रशिक्षित भारतीय स्नातकों की भर्ती की जाएगी। योजना के तहत 100,000 भारतीय भारतीयों को प्रशिक्षण देने के साथ ही 30,000 प्रशिक्षित स्नातकों की स्थानीय स्तर पर भर्ती की जाएगी।
ऑस्ट्रलियाई अखबार ‘फाइनैंशियल बिजनेस’ के मुताबिक दोनों देशों के अधिकारियों ने क्षेत्रीय संस्थाओं और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए विचार-विमर्श करना शुरू कर दिया है।
भारतीय स्नातकों की भर्ती से खनन कंपनियों में भी पेशेवरों की मांग पूरी हो सकेगी, जो कि दोनों देशों के अधिकारियों के साथ बातचीत की प्रक्रिया में है। भारत में ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ वाणिज्य अधिकारी पीटर लिनफोर्ड ने अखबार से बातचीत में कहा कि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत शिक्षा और उद्योग क्षेत्र में अनेक अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि यह मॉडल दूसरे देशों के लिए भी मार्गदर्शन का काम कर सकता है। भारतीय प्रशिक्षुओं को आस्ट्रेलियाई मापदंडों के हिसाब से तैयार किया जाएगा और उनके काम की परिस्थितियां भी ऑस्ट्रलिया के हिसाब से होगी।
गौरतलब हैं की, ऑस्ट्रेलिया ने अपने यहां रहनेवाले भारतीयों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच आज यह ऐलान कर दिया कि अब वह केवल उच्च दक्षतावाले क्षेत्रों में ही काम करने वाले विदेशी नागरिकों को आने की अनुमति देगा। ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन और नागरिकता मंत्री क्रिस इवांस ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सरकार केवल उन्हीं पेशेवरों को ऑस्ट्रेलिया आने की अनुमति देने के पक्ष में है जो उच्च दक्षतावाले क्षेत्र से जुड़े हैं। उन्होंने स्वास्थ्य देखभाल, इंजीनियरिंग और खनन क्षेत्रों का खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा कि किसी ऑस्ट्रेलियाई नियोक्ता के साथ काम करनेवाले विदेशी नागरिकों को वरीयता दी जाएगी।
उन्होंने इसे स्थानीय उद्योग जगत की जरूरत के मुताबिक उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया को भारत, चीन और ब्रिटेन जैसे देशों से आनेवाले प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये देश ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में शामिल हैं और उनके यहां प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है। हालांकि श्री इवांस ने आव्रजन नियमों में इस बदलाव का यहां आनेवाले विदेशी छात्रों की संख्या पर कोई असर पड़ने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया आकर वैध शिक्षा हासिल करके अपने देश लौट जाने वाले छात्रों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।