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• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

GAJAL

   Jun 10, 2016    No Comments

शाम आती भी है तो कुछ उदासी लिए
ज्यो चरागो की लौ होधुआ सी लिए
इक तो बरसो मे नज़रो मे आए सनम
उस पे ःओठो मे क्यू बद्दुआ सी लिए
हम तो सुनकर ही दौड़े चले आए है
दिल मे मिलने की तुमसे रजा सी लिए
इस हाल का था ख्याल ही नही रे
सोचा मिलोगे महकती फ़िज़ा सी लिए
हाल अपना भी कुछयू बेहतर नही
वक्त कटता रहा इक सज़ा सी लिए
अब खाक जिंदा रहेंगे सनम हम
आप भी जब अपनी जुबा सी लिए

UPENDRA DWIVEDI
NAGPUR

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