Girish Pankaj
गिरीश पंकज
सम्पादकीय सलाहकार
Arun Kumar Jha
अरुण कुमार झा
प्रधान संपादक
Rajiv Anand
राजीव आनन्द
संपादक
Vinay Kumar Mishra
विनय कुमार मिश्र
संपादन सहयोगी
• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

साहित्य


जीवन- नदिया

  पल-पल बहती जीवन-नदिया, सागर इसे बुलाए रे! मिलने के उल्लास में पगली!, दौड़ी – दौड़ी जाए रे!! जन्मों का नाता सागर से, प्रीत को कैसे भूल सके? बाधाओं से लोहा लेती, नेह का झूला झूल सके!! कोई बाधा रोक ना पाए, प्रेम – गीत नित गाए रे! मिलने के उल्लास में पगली!, दौड़ी –…


लोकतंत्र बचाने के लिए जरूरी है पुरस्कार वापसी

‘‘पिछले कुछ हप्तों में लेखकों, वैज्ञानिकों और कलाकारों के सम्मान लौटाने की बाढ़ देखी गई। पुरस्कार लौटाने के जरिये ये सम्मानित और पुरस्कृत लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए खड़े हुए हैं। बढ़ती असहिष्णुता और हमारे बहुलतावादी मूल्यों पर हो रहे हमलों पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए इन शिक्षाविदों, इतिहासकारों, कलाकारों और वैज्ञानिकों…


स्वतंत्रता कहाँ है ? स्वतंत्र कहाँ है स्त्री ?

कल निर्भया आज फिर एक दामिनी कल कोई और स्त्री स्वतंत्र कहाँ है? पाखंड अत्याचार अमानुषिकता फिर बलात्कार क्यों हमेशा स्त्री को ही उठानी पड़ती है? दिल रोता है- जिम्मेदार कोन है इसकी शासन, सरकार या लोग क्या भारत का न्यायालय स्त्रियों को न्याय देने में असमर्थ रही? हर बार किसी औरत को शिकार बनाया…


अनवर सुहैल की छः कविताएँ

एक जब कोई करता है विध्वंस कवि एक अच्छी कविता सिरजता होता है जब कोई उगलता है नफरत के जुमले कवि शब्दकोष में खंगालता है प्रेम, भाईचारा, दोस्ती और अमन के पर्यायवाची शब्द जब कोई ताकता है शेयर बाज़ार के उतार-चढाव कवि अपनी मासिक आय के दस प्रतिशत दाम की खरीदता है कविता की किताब…


अपने समय की संवेदनशील अभिव्यक्ति

कविता के भविष्य के विषय में सुनकर मन जितना आशंकित है, उससे कहीं ज्यादा यह उम्मीद बंधाता है कि मनुष्यता को बचाने के लिए कविता अपना कार्य हमेशा करती रही है और आगे भी करती रहेगी. शायद किसी ने ठीक ही कहा है कि मनुष्यता को बचाने की आखिरी उम्मीद कविता है. इसी परम्परा के…


धरती जीने और संसद चलने लायक लायक कैसे होगी ?

 मानव जिंदगी का अंतिम सच मृत्यु है और पूरा सच सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए इसकी वह अनंत सार्थकता है जिसे उसे पूरी मानवीय ईमानदारी के साथ जीने में सफल होना होता है। मानव होकर इस पूर्ण मानवीय ईमानदारी के साथ जीने का प्रयास करने वालों की संख्या दुर्भाग्य से अभी धरती पर कम है। भारत…


शेरों ने लौटाई हड्डियां

जवाहर चौधरी  शेर नाराज हो गए। नाराज होना और नाराज बने रहना शेरों का काम है। नाराज नहीं हो तो शेरों को कोई षेर न कहे। पहचान की इस चिंता के कारण बेचारे शेर प्रायः मुस्कराते भी नहीं है। लेकिन जब कोई शेर हंसता दिखाई दे जाता है तो उसके कई मायने होते हैं जिन्हें…


कुर्सी का खेल

कुर्सी से उतरते ही सहिष्णु ?

-गिरीश पंकज उस दिन भूतपूर्व मंत्री रामलाल जी मिल गये. पहले सत्ता में थे, अब सड़क पर हैं. सड़क पर आते ही उनकी कमर कुछ झुक -से गयी थी . जबकि लोगों ने देखा है कि कल तक तन कर चलते थे . बड़ी ही नफासत से निकलते थे। इधर-उधर तो देखते ही नहीं थे.…


कविरत्न मिरदाहा के समकालीन नागपुरी कहानीकार

लोक कथाओं की जमीन पर नागपुरी कहानियों की यात्राआरम्भ हुई। शिष्ट कहानियों का जन्म नागपुरी में 1960 के बाद ही हुआ, लेकिन लोक कथा की परम्परा बहुत पहले से मिलती है। डा॰ गिरीधारी राम गंझू ने लिखा है-रमायण महाभारत आदि मनकर कथा नागपुरी लोक कथा में आपन रंग-रूप धइर के चलेक लागलक। ई लोक कथा…


नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार की कविता

ये इश्क नहीं है आसान प्रिये तुम कल्पना, मैं कड़वा यथार्थ हूं, तुम जीवन, मैं मुसीबतों का पहाड़ हूं इसलिए, ये इश्क नही है आसान प्रिये। तुम अनन्त, मैं शून्यता का प्रमाण हूं तुम ज्योति, मैं चहुंओर फ़ैला अंधकार हूं इसलिए, ये इश्क नहीं है आसान प्रिये। तुम अर्चना और उपासना जैसी हो, मैं विधुर…


कृष्णा कुमार यादव

राजस्थान साहित्य परिषद ने कृष्ण कुमार यादव को किया सम्मानित

-राजेंद्र ढाल प्रशासन के साथ-साथ हिंदी साहित्य और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ एवं साहित्यकार व लेखक श्री कृष्ण कुमार यादव को राजस्थान साहित्य परिषद् की ओर से 4 नवंबर को सम्मानित किया गया। श्री यादव को यह सम्मान उनके हनुमानगढ़ प्रवास के…


साहित्य अकादमी

साहित्यकारों की सम्मान वापसी और सरकार

-बजरंग मुनि पिछले दिनों जब से भारत की राजनैतिक व्यवस्था में एक सम्प्रदाय का एकाधिकारवादी हस्तक्षेप समाप्त होकर दूसरे सम्प्रदाय का हस्तक्षेप शुरु हुआ है तभी से राजनेताओं के साथ-साथ विचार प्रतिबद्ध साहित्कारों के बीच भी टकराव बढ़ गया है। इसी तरह राजनैतिक व्यवस्था के बदलते ही वामपंथी राजनेताओं के साथ-साथ वामपंथ से प्रतिबद्ध साहित्कारों…


देवेन्द्र आर्य की पांच ग़ज़लें

(1) तुझ को भले पता न हो ,पेड़ों को पता है किस ओर पीठ है तेरी किस और हवा है। बारिश में भींगने को मचलने लगा मौसम शायद तुम्हारी आँखों में घिर आई घटा है। शर्मिंदगी सी लगती है तब नींद को खुद पर जब रात पूछती है ‘अभी कितना बजा है। ’ स्वागत में…


पुरूस्कार वापसी का मासूम सच

लघुकथा सुबह सबेरे हाथ में अखबार लहराती भागती हुई नन्हीं सरस्वती लेखक अंकल के कमरे में आ पहुंची थी – ” लेखक अंकल देखो अखबार में आपकी फोटो छपी है ” ज्ञानचंद ज्ञानी ने उत्साहित सरस्वती को देख मुस्कुराते हुए कहा था – ” हाँ बेटा मैंने देखा है ” ” लेखक अंकल आपकी फोटो…


पुरस्कार वापसी का सच

प्रख्यात अन्तर्राष्ट्रीय लेखिका तसलीमा नसरीन ने दिनांक २९.१०.१५ को अपने एक बयान में कहा है कि पहले मुझे लग रहा था कि सच में साहित्यकार पुरस्कार वापिस करके अपने दुख की अभिव्यक्ति कर रहे हैं, परन्तु अब भारत में जिस तरह से पुरस्कार वापिस किए जा रहे हैं और जो कारण दिया जा रहा है,…


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