Girish Pankaj
गिरीश पंकज
सम्पादकीय सलाहकार
Arun Kumar Jha
अरुण कुमार झा
प्रधान संपादक
Rajiv Anand
राजीव आनन्द
संपादक
Vinay Kumar Mishra
विनय कुमार मिश्र
संपादन सहयोगी
• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

व्यंग्य


जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

तारकेश कुमार ओझा तब साझा – चूल्हा और संयुक्त परिवार की खासी महत्ता थी। गांव हो या शहर  हर तरफ यह गर्व का विषय होता था। बड़े – बुजुर्ग बड़े अभिमान से कहते थे बड़ा परिवार होने के बावजूद उनके यहां आज भी एक ही चूल्हा चलता है।  लेकिन इस विशेषता का एक विद्रूप पक्ष…


शेरों ने लौटाई हड्डियां

जवाहर चौधरी  शेर नाराज हो गए। नाराज होना और नाराज बने रहना शेरों का काम है। नाराज नहीं हो तो शेरों को कोई षेर न कहे। पहचान की इस चिंता के कारण बेचारे शेर प्रायः मुस्कराते भी नहीं है। लेकिन जब कोई शेर हंसता दिखाई दे जाता है तो उसके कई मायने होते हैं जिन्हें…


कुर्सी का खेल

कुर्सी से उतरते ही सहिष्णु ?

-गिरीश पंकज उस दिन भूतपूर्व मंत्री रामलाल जी मिल गये. पहले सत्ता में थे, अब सड़क पर हैं. सड़क पर आते ही उनकी कमर कुछ झुक -से गयी थी . जबकि लोगों ने देखा है कि कल तक तन कर चलते थे . बड़ी ही नफासत से निकलते थे। इधर-उधर तो देखते ही नहीं थे.…


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