Girish Pankaj
गिरीश पंकज
सम्पादकीय सलाहकार
Arun Kumar Jha
अरुण कुमार झा
प्रधान संपादक
Rajiv Anand
राजीव आनन्द
संपादक
Vinay Kumar Mishra
विनय कुमार मिश्र
संपादन सहयोगी
• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

लेख


रायचन्द

   Dec 31, 2015    No Comments

 नीतू सिंह  ‘रेणुका’ हम सब को दूसरों को राय देने की बहुत बुरी आदत है। शायद ही कोई ऐसा हो जिसने दूसरों को राय न दी हो। “तुम्हें ऐसा नहीं वैसा करना चाहिए था।” या “मैं तुम्हारी जगह होता तो ऐसा करता. . . . “। हम सभी ऐसा कहते हैं क्योंकि हम सभी अच्छी…


आखिर कब तक चलेगा बुजुर्गो की भावनाओं के साथ खिलवाड़

गृहस्‍त आश्रम में प्रवेश क्‍या किया हम जीना ही भूल जाते है।भविष्‍य और बच्‍चों की चिन्‍ता में दिन रात लगें हुए पाई पाई जोड़ कर अपने बच्‍चों का सुख और उनका भविष्‍य खरीदना चाहते है। हम भूल जाते है हमारी अपनी भी जिन्‍दगी है। अपने अरमानों को अपने सपनों को कर्तव्‍य दर कर्तव्‍य बढ़ाते चले…


K.k yavad

भारतीय संस्कृति में सद्भाव के सूत्र

विश्व के सबसे विशाल लोकतन्त्र के रूप में भारतीय धरा ने विभिन्न जातियों, धर्मों और भाषाओं की खूबसूरत सतरंगी माला को आत्मसात् किया हुआ है। भारत में एक अरब से ज्यादा लोग जिसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं तमाम जातियाँ व जनजातियाँ शामिल हैं, उनकी जड़ों में सामाजिक-साम्प्रदायिक सद्भाव एक विशिष्ट रूप में मौजूद होकर…


लोकतंत्र बचाने के लिए जरूरी है पुरस्कार वापसी

‘‘पिछले कुछ हप्तों में लेखकों, वैज्ञानिकों और कलाकारों के सम्मान लौटाने की बाढ़ देखी गई। पुरस्कार लौटाने के जरिये ये सम्मानित और पुरस्कृत लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए खड़े हुए हैं। बढ़ती असहिष्णुता और हमारे बहुलतावादी मूल्यों पर हो रहे हमलों पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए इन शिक्षाविदों, इतिहासकारों, कलाकारों और वैज्ञानिकों…


स्वतंत्रता कहाँ है ? स्वतंत्र कहाँ है स्त्री ?

कल निर्भया आज फिर एक दामिनी कल कोई और स्त्री स्वतंत्र कहाँ है? पाखंड अत्याचार अमानुषिकता फिर बलात्कार क्यों हमेशा स्त्री को ही उठानी पड़ती है? दिल रोता है- जिम्मेदार कोन है इसकी शासन, सरकार या लोग क्या भारत का न्यायालय स्त्रियों को न्याय देने में असमर्थ रही? हर बार किसी औरत को शिकार बनाया…


धरती जीने और संसद चलने लायक लायक कैसे होगी ?

 मानव जिंदगी का अंतिम सच मृत्यु है और पूरा सच सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए इसकी वह अनंत सार्थकता है जिसे उसे पूरी मानवीय ईमानदारी के साथ जीने में सफल होना होता है। मानव होकर इस पूर्ण मानवीय ईमानदारी के साथ जीने का प्रयास करने वालों की संख्या दुर्भाग्य से अभी धरती पर कम है। भारत…


भविष्य घट रहा है

स्व. कैलाश वाजपेयी रचित कविता ‘भविष्य घट रहा है’ की कविताओं में प्रेम और शेषप्राय पारस्परिकता के बीच सोये-खोये वे रिक्त-स्थल भी मुखर हैं जो सर्वथा नये हैं या फिर जो रोजमर्रा की जिन्दगी जीते आदमी की पकड़ से चुपचाप छूट जाते हैं। आज की सार्थक हिन्दी कविता के पाठकों के लिए एक विचारोत्तेजक कविता-…


ललित मोदी के ईमेल में नाम आने के कारण सुरेश रैना को दिया गया था आराम!

नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम में महेंद्र सिंह धौनी और विराट कोहली के बाद की हैसियत रखने वाले सुरेश रैना को जिंबाब्वे दौरे पर इसलिए नहीं भेजा गया था, क्योंकि ललित मोदी ने आईसीसी को भेजे ईमेल में उनके नाम का जिक्र किया था. इस बात का खुलासा आज इंडियन एक्सप्रेस ने किया है.…


Youtube
Sensex

अन्य ख़बरें

Submit Your Article

Copyright © 2015. All rights reserved. Powered by Origin IT Solution