Girish Pankaj
गिरीश पंकज
सम्पादकीय सलाहकार
Arun Kumar Jha
अरुण कुमार झा
प्रधान संपादक
Rajiv Anand
राजीव आनन्द
संपादक
Vinay Kumar Mishra
विनय कुमार मिश्र
संपादन सहयोगी
• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

About Author

गिरीश पंकज

Member Since: 01 01, 2008

साहित्य और पत्रकारिता की दुनिया में चार दशक से बेहद सक्रिय। देश के अनेक महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित। रायपुर के कुछ चर्चित बड़े अखबारों में मुख्य नगर संवाददाता और संपादक रहने के बाद इन दिनों स्वतन्त्र लेखन और साहित्यिक पत्रिका ''सद्भावना दर्पण' का सम्पादन। देश-विदेश में अनेक बार सम्मानित। साहित्य अकादमी , दिल्ली के पूर्व सदस्य. आठ उपन्यास और पंद्रह व्यंग्य संग्रह समेत कुल अड़तालीस पुस्तके प्रकाशित. आठ छात्रों द्वारा इनके व्यंग्य साहित्य पर पी-एच-डी. उपाधि हेतु शोधकार्य जारी।


Mahatma (BAPU)

गांधी जी की शहादत

Posted by at Jan 30, 2016

गिरीश पंकज    गांधी जी की शहादत का दिन है आज. मैं अभी उनकी पुण्यतिथि मना कर लौट रहा हूँ. गांधी क्या थे, यह अब किसी को बताने की ज़रुरत नहीं. गांधी के चरित्र को अपनी कुछ पंक्तियों में समझने की कोशिश कर रहा हूँ इस जगत में मुक्ति की पतवार थे गांधी थे भले इंसान…


बहुरुपिया

मनेन्द्रगढ़ का ‘बहुरुपिया’  आयोजन

Posted by at Jan 2, 2016

छत्तीसगढ़ का मनेन्द्रगढ़ कस्बा अपनी राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक सक्रियता के लिये पहचाना जाता है. यहाँ के कुछ लोग जीवंत हो कर अपने कसबे को जीवंत बने रखने का काम करते रहते हैं।  ‘सम्बोधन साहित्य एवं कला परिषद’ तीन दशक से सक्रिय है, तो ‘प्रगति मंच’ पिछले पच्चीस वर्षो से बहुरुपिया प्रतियोगिता का अभिनव…


Anil vij

लोकतंत्र में मंत्री बड़ा या अफसर?

Posted by at Nov 29, 2015

पिछले दिनों एक बैठक में हरियाणा के एक मंत्री अनिल विज की फतेहपुर की महिला पुलिस अधिकारी संगीता कालिया से बहस हो गयी. बहस इतनी बढ़ी कि मंत्री ने कहा ”गेट आउट, यहाँ से चले जाइए.” मगर महिला पुलिस अधिकारी ने कहा- ”नहीं जाऊँगी” तब मंत्री खुद उठ कर चले गए और दूसरे दिन ही…


aatank ke shikar

ओ निर्मोही बमों कुछ फूल भी खिलते हैं वहाँ…

Posted by at Nov 23, 2015

बमों को नहीं पता होता कहाँ छिपे हैं आतंकी वे तो निकलते हैं अंधे पागल आत्मघाती दरिदों की तरह और मासूम बच्चो का लहू बहा कर नष्ट हो जाते है. आतंकी होते हैं चालाक बदलते रहते हैं अपनी जगह बच्चे नहीं होते आतंकी, नहीं होते चालाक वे खेलते रहते है कहीं भी अपने खेल और…


बबनप्रसाद मिश्र

निर्भीक, स्वाभिमानी और सिद्धांतवादी संपादक थे बबनप्रसाद मिश्र

Posted by at Nov 19, 2015

7 नवम्बर, 2015 की मनहूस शाम हम कभी नहीं भूल पाएंगे, जब छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के शीर्ष पुरुष बबनप्रसाद मिश्र जी हम सबको छोड़ कर चले गये. उनके जाने के साथ ही पत्रकारिता का एक ऐसा शिखर ढह गया, जो हम सबके लिए प्रेरणा का काम करता रहा. नई पीढ़ी भी उनके बार में जब…


कुर्सी का खेल

कुर्सी से उतरते ही सहिष्णु ?

Posted by at Nov 6, 2015

-गिरीश पंकज उस दिन भूतपूर्व मंत्री रामलाल जी मिल गये. पहले सत्ता में थे, अब सड़क पर हैं. सड़क पर आते ही उनकी कमर कुछ झुक -से गयी थी . जबकि लोगों ने देखा है कि कल तक तन कर चलते थे . बड़ी ही नफासत से निकलते थे। इधर-उधर तो देखते ही नहीं थे.…


अन्य ख़बरें

Submit Your Article

Copyright © 2015. All rights reserved. Powered by Origin IT Solution