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• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

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अरुण कुमार झा

Member Since: 01 01, 1996

1976 से पत्रकारिता, दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, एवं मासिक का संपादन. वर्तमान में 1996 से दृष्टिपात हिंदी मासिक पत्रिका का संपादन-सञ्चालन. सभी विधा में लेखन.


पानी बचाने का क्षुद्र उपाय

Posted by at Jun 21, 2015

45 साल पहले की बात है। मैं गाँव से पहली बार एक छोटे शहर में आया था। इस शहर में पानी की उस वक्त काफी किल्लत थी। लोग कुएँ को जालीनुमा ढक्कन में ताले लगाकर रखते थे, ताकि कुएँ से कोई पानी न निकाल पाए। लेकिन चोर तो सभी जगह होते हैं। पानी चुरा ही…


इस विकट समय में गांधी ही विकल्प हैं

हर देश और हर काल में मनुष्य की बुनियादी जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान ही हैं। इन्हीं जरूरतों की पूर्ति के लिए मनुष्य अपनी मनुष्यता को धीरे-धीरे छोड़ता जा रहा है। जैसे ही रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरतें पूरी होती हैं दिमाग में खुराफात का जन्म शुरू हो जाता है। यह खुराफात इतना बढ़…


उनके एजेण्डे में देश नहीं

पूरी दुनिया दहशत में है। डरा हुआ व्यक्ति हर वह काम कर जाता है, सभ्य समाज जिसके लिए इजाजत नहीं देता। डरे हुए व्यक्ति से समाज की भलाई की अपेक्षा नहीं की जा सकती। डरे हुए व्यक्ति देशभक्त कदापि नहीं हो सकता। हम यहाँ भारत की बात कर रहे हैं। भारतीय समाज के लोग डरे…


जिंदगी प्यार का गीत है

मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है, कोई अब तक तय नहीं कर पाया। शास्त्रों में इसका कोई ठोस उल्लेख नहीं मिलता। अगर है भी तो इसकी व्याख्या लोग अपने-अपने ढंग से कर रहे हैं। भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हम अंधकार में भटक रहे हैं- रोशनी की तलाश में। लेकिन वह कौन सी रोशनी…


ऐसे आएँगे अच्छे दिन

अब भी भारतीय समाज दब्बू, पिछलग्गू और धर्मभीरू है। इसी के कारण निर्मल बाबा, आसाराम बापू न जाने कितने उनके जैसे लोगों के दुष्प्रभाव में आकर अपना सर्वस्व गँवा बैठता है। भारतीय समाज में अनपढ़-गँवार को कौन कहें, पढ़े-लिखे लोग भी भेड़ चाल चल रहे हैं। समाज के पिछलग्गूपन होने की कमजोरी को धूर्त लोग…


अच्छे दिन आने वाले हैं!

सोलहवीं लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ। परिणाम भी आ गये। सोलहवीं लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक रहा। ऐतिहासिक इस मायने में कि किसी एक आदमी ने अपने दम पर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह विलक्षण प्रतिभा का द्योतक है। इस चुनाव में जिस प्रकार से एक व्यक्ति ने जाति, भाई-भतीजावाद, वर्गवाद, कुछ हद तक धर्मवाद से हट…


भारत में जनता की सेवा राम भरोसे

प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है। लेकिन कुछ धूर्त लोगों ने लालच और स्वार्थ के वशीभूत होकर प्रकृति के सारे उपादानों को अपने पक्ष में करने के लिए तरह-तरह के उपाय ढूंढ लिए- अधिसंख्यक को गुलाम बनाने के उपायों की व्यवस्था के तहत। उन्हीं में से एक है राजतंत्रा और दूसरा है लोकतंत्र। लोकतंत्र…


वचनबद्धता ही वसंत लायेगी

इतिहास गवाह है कि विदेशी आक्रमणकारी अपने-अपने तरीके से भारत को हजारों वर्षों तक लूटते-खसोटते रहे। भारतीय सभ्यता और संस्कृति को दुष्ट आतताइयों ने नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। लेकिन देश के वीर सपूतों ने- उनके सारे नापाक मनसूबों पर पानी फेर दिया और अपनी मिट्टी और देश के प्रति वचनबद्धता के…


लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सामंतवादी बू

अब भारत के बेटे को भारत की मिट्टी की सोंधी महक अपनी ओर खिंचती हुई दिखाई नहीं देती। अब कोई सपूत भारत माता पर न्योछावर होने को तत्पर नहीं दिखाई नहीं देता! शायद ही अब कोई माता-पिता यह चाहता है कि उसका बच्चा भारत माता की सेवा में अपनी भारत-भूमि पर कार्य करे। अब अधिकांश…


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