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रौशनी ही कालिमा की मात है…

गजल संघ्या व सम्मान समारोह का आयोजन


साहित्य एवं पत्रकारिता भारती और प्रेस क्लब आॅफ कोयलांचल रामगढ के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गीतकार डाॅ. यशोधरा राठौर के सम्मान में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसकी अघ्यक्षता चंद्रिका ठाकुर ‘देशदीप’ ने की। मुख्य अतिथि डाॅ. कौलेश्वर तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि यशोधरा जी कारयित्री एवं भावमित्री प्रतिभा की समन्वित रचनात्मक व्यक्तित्व हैं। पृथ्वी कहते हैं लोग इसे, उस गली के मोड़ पर, जैसे धूप हंसती है, भरेंगे रपवाज के पैगाम अक्षर नामक कृतियों में जिंदगी की सच्चाई, प्रकृति व संस्कृति के साथ मानवीय मुक्ति की छटपटाहट व्यक्त है।

कवि गोष्ठी

                                                                                                                                 कवि गोष्ठी

डाॅ. यशोधरा को प्रतीक व सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर कवि-गोष्ठी का भी आयोजन हुआ। जिसमें डाॅ. यशोधरा ने सांप्रतिक राजनीतिक विद्रूपता एवं मूल्यों के क्षरण पर चोट की-सियासत ने दी यहीं सौगात है, रौशनी ही कालिमा की मात है। डाॅ सिद्वेश्वर काश्यप् ने प्यार की गजल सुनाया और कहा मुल्क अपना मिसाल दुनिया में हर जवां को बहार करते हैं, जिंदगी प्यार का खजाना है, हम इसे बार-बार करते हैं। जान देते हमीं वतन पर भी जीत का एतवार करते हैं। सरोज कांत ने कहा कि उपभोक्तावादी अपसंस्कृति में मणुष्य अजनबी है-उजालों से मैं डरता हूॅ, अंधेरे में ही रहता हूॅ, अंधेरे की की ये खुबी है, इसमें वहम नही होता। चंद्रिका ठाकुर देशदीप ने समाज की आपाधापी और विद्रूपता पर चोट की- अंधेरी रात को अब भोर कह रहें हैं सभी, वो उजालों को फकत शोर कह रहें हैं सभी। बालकवि सचिन ने पिता शीर्षक की कविता सुनाकर लोगों को मंत्रगग्ध किया। कविता पाठ करतेवालों में डाॅ हरेंद्र कुमार, राज रामगढ़ी, आशीष ठक्कर, डाॅ गजाधर महतो प्रभाकर आदि थें। मौके पर डाॅ बिरेंद्र सिंह, विनय सिंह, विजयंत कुमार, संजय मिश्रा, उत्तम सिन्हा, जितेंद्र तिवारी, अशोक गुप्ता, अवधेष कुमार सिंह, प्रमोद कुमार, विजय प्रसाद, राजेश मिश्रा, अषोक राय, जितेंद्र पासवान, दीपक कुमार, धमेंद्र यादव, बिरेंद्र भगत, अमित पाठक आदि उपस्थित थें।

One response to “रौशनी ही कालिमा की मात है…”

  1. सरोज कांत झा says:

    दृष्टिपात पत्रिका का हृदय से आभार है। विशेषकर श्री अरुण झा साहेब का जिन्होंने इस कार्यक्रम में आकर शोभा बढ़ायी और इस तरह के साहित्यिक कार्यक्रमों को पत्रिका में प्रमुखता से प्रकाशित किया।

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