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मोदी की प्रगति- छः महीने में 3.91 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट क्लीयर


नई दिल्ली। सरकारी लालफीताशाही से अरबों रूपये के विकास प्रोजेक्ट्स की अड़चनें दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद बीड़ा उठाया है। इसके लिए पीएम मोदी हर महीने आला नौकरशाहों और राज्य के अधिकारियों से मीटिंग कर रहे हैं। इसी के चलते इस साल मार्च से लेकर सितंबर तक करीब 60 अरब डॉलर यानि 3.91 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट क्लीयर हो गए। मीटिंग में पीएम प्रोजेक्ट्स को शुरू करने में आने वाली दिक्कतों के बारे में पूछते हैं और फिर उन्हें तुरंत दूर करने के लिए सुझाव लेते हैं।
हालांकि अभी भी 150 अरब डॉलर के रोड, रेलवे, पावर स्टेशन और अन्य प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। पीएम मोदी इस संबंध में हर�महीने�के चौथे बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग लेते हैं। इन मीटिंग में वित्त, कानून, लैंड, पर्यावरण, ट्रासंपोर्ट और एनर्जी मंत्रालयों से जुड़े अधिकारी शामिल होते हैं। मीटिंग से एक सप्ताह पहले बैठक का एजेंडा तय हो जाता है और एक दर्जन प्रोजेक्ट, लोगों की समस्याओं पर चर्चा की जाती है। हर बैठक में मोदी का प्रोजेक्ट को लेकर एक ही सवाल होता है कि, यह क्यों अटका हुआ है?
इन मीटिंग को “प्रगति” यानि प्रो एक्टिव गवर्नेस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन नाम दिया गया है। अफसरों के अनुसार कई बार मीटिंग में चर्चा के लिए शामिल होने से पहले ही कुछ प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाती है। राजनीतिक विरोधी और उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव ने भी लखनऊ में मेट्रो रेल योजना को प्रगति की मीटिंग में शामिल करने की अपील की थी। सितंबर में इस पर चर्चा की गई और प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के साथ ही सेंट्रल फंडिंग का वादा भी किया गया।
इस तरह की मीटिंग के पीछे पीएम मोदी का मकसद भारत को 2017 तक बिजनेस करने के लिहाज से आसान दुनिया के टॉप 50 देशों में शामिल कराना है। हाल ही में जारी हुई वर्ल्ड बैंक की सूची में भारत ने चार स्थान की छलांग लगाई थी और यह सब केवल एक बाधा दूर होने से हो गया था। इससे पीएम मोदी और अधिकारियों में उत्साह है।
by www.patrika.com/

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