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बढ़ रही है झारखंड की हरियाली

दस माह के भीतर राज्य भर में लगे 1.30 करोड़ पौधे


जल्द ही विकसित होगा गज कॉरीडोरए बनेगी ग्राम समितिए बढ़ेंगे संसाधन
95 प्रतिशत वन भूमि के आंकड़ों का हुआ डिजिटाइजेशन – श्री सुखदेव सिंह. प्रधान सचिव
वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव श्री सुखदेव सिंह ने कहा है कि यह एक मिथक है कि विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं। हकीकत यह है कि राज्य गठन से बाद से अब तक जहां एक ओर 9.15 लाख वृक्षों की कटाई की अनुमति दी गयीए वहीं दूसरी ओर 42.39 करोड़ पौधों का रोपण किया गया। चालू वित्तीय वर्ष में अब तकए यानी पिछले दस महीनों में राज्य भर में 1.30 करोड़ पौधे लगाये जा चुके हैं। श्री सिंह शुक्रवार को सूचना भवन स्थित सभागार में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
श्री सिंह ने बताया कि झारखंड में अधिसूचित वनों का क्षेत्रफल 23605 वर्ग किलोमीटर हैए जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.61 प्रतिशत है। वर्ष 2001 से 2015 की तुलना करेंए तो 974 वर्ग किलोमीटर वनाच्छादन में वृद्धि हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि झारखंड की हरियाली न सिर्फ बरकरार रखी गयी हैए बल्कि यह बढ़ भी रही है। राष्ट्रीय औसत के हिसाब से किसी भी राज्य में वनों का क्षेत्रफल कुल उपलब्ध भूमि का 33 फीसद होना चाहिए। इस लिहाज़ से झारखंड राष्ट्रीय औसत के काफी करीब हैए लेकिन यह लक्ष्य तभी साधा जा सकता हैए जब आम लोगों का सहयोग मिले। राज्य में वन क्षेत्र और वनाच्छादन में बढ़ोत्तरी के मद्देनजर राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री जन वन योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत निजी भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए लाभुक को कुल लागत की 50 फीसद राशि सरकार की ओर से दी जाएगी। इसके अतिरिक्त वन भूमि के संरक्षण के लिए विभाग में उपलब्ध सभी नक्शों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। अब तक 95 प्रतिशत नक्शों को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में बदला जा

चुका है। शेष 5 प्रतिशत एक साल के भीतर डिजिटाइज़ कर दिये जायेंगे। इतना ही नहीं राज्य के वन क्षेत्र की सीमाओं की डिफरेंशियल ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीक से सर्वे और सीमा स्तम्भ का निर्माण किया जा रहा है।
श्री सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने ईको.टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक नीति बनायी है। इसके तहत मूलभूत संरचनाएं जैसे सड़कए बिजली तथा पानी की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही पर्यटकों के ठहरने के लिए विश्रामागारए टेंट हाउसए ट्री हाउस एवं अन्य मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराये जाएंगे। दूर.दराज के क्षेत्रों में जहां इको.टूरिज्म के लिए जगह चिह्नित किये जायेंगेए वहां के स्थानीय युवाओं इको.गाइड के रूप में प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जायेगा।
प्रदेश के कई हिस्सों में हाथियों के उत्पात पर श्री सिंह ने बताया कि राज्य में एक गज परियोजना की शुरुआत की जा रही है। इसके तहत अगले वर्ष तक हाथियों के लिए एक कॉरीडोर विकसित कर लिया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर ग्राम सुरक्षा समिति बनायी जाएगीए जो हाथियों के हमले की स्थिति में उनसे कारगर ढंग से निपट सकें। इस समिति को सभी अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार रांची में वाइल्ड लाइफ कंट्रोल रूम स्थापित करने जा रही है।
राज्य में बाघों की संख्या पर संशय की स्थिति स्पष्ट करते हुए राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (मुख्यालय) श्री बीसी निगम ने बताया कि अब तक पलामू व्याघ्र परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत जितने भी सर्वेक्षण हुए हैंए उनमें बाघों की स्पष्ट संख्या नहीं बतायी गयी है। विभाग ने अब खुद बाघों की सटीक और वैज्ञानिक गणना करने का फैसला किया है। व्याघ्र क्षेत्र की व्यापकता को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अभी राज्य में 15 बाघ हो सकते हैंए लेकिन यह केवल अनुमान है। उन्होंने बताया कि वन्य जीवन के वरिष्ठ शोधकर्ता प्रोण् रघुराम और ग्लोबल टाइगर फोरम के श्री राजेश गोपाल से राज्य में व्याघ्र परियोजना पर काम करने हेतु संपर्क साधा गया है।
प्रेस वार्ता में पूछे गये एक सवाल के जवाब में श्री सिंह ने कहा कि वन क्षेत्र की सीमा के भीतर अवैध रूप से अगर क्रशर चलता पाया गयाए तो संबंधित वन कर्मी.अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संवाददाता सम्मेलन में पीसीसीएफ एके प्रभाकरए प्रदीप कुमार और विशेष सचिव श्री एके रस्तोगी भी उपस्थित थे।

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