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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का जन्म दिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया


 विनय मिश्र


चक्रधरपुर. 26 दिसम्बर  आज स्थानीय वन विश्रामागार में पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी बाजपेयी का 91 जन्म दिन हर्शोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सिंहभूम के सांसद लक्ष्मण गिलुवा ने श्री बाजपेयी के दीर्घायु होने की कामना की । श्री गिलुवा ने वाजपेयी जी के जीवन पर विचार डालते हुए कहा श्री अटल जी का जन्म 25 दिसंबर आज ही के दिन 1924 को ग्वालियर में सिन्दे छावनी में हुआ था ।

Bajpai Ji ke Janm Diwas Par Sambodhit Karte Laxman Giluwa

                                                                             बाजपेयी के जन्म समारोह में बीजेपी के नेतागण 

वे बचपन से ही पढ़ने में काफी मेधावी थे । ग्वालियर से बी0ए0 पास कर वे कानपुर डीएवी काॅलेज में एम0ए0 व कानून की पढ़ाई किया । यह संयोग की ही बात है कि बाजपेयी जी व उनके पिता कृश्ण बिहारी वाजपेयी के साथ कानून की पढ़ाई साथ-साथ की । कविता लिखने में अटल जी की बचपन से ही रूची रही थी । वे जब कक्षा 9 के छात्र थे तो उन्होने ताज महल और कवि आज सुना व गान रे कवितायें लिखी थी । अटल जी कवि सम्मेलनों में भी बहुत जाते थे तथा जोष के साथ कविता सुनाया करते थे । उनकी कविता मेरी 51 कवितायें काफी प्रसिद्ध रही है तथा उसका विमोचन तत्कालीन प्रधानमंत्री पी0 वी0 नरसिंहा राव ने किया था । वाजपेयी जी 1957 के चुनाव में प्रथम बार सांसद चुने गये । संसद में उनका पहला भाशण हिन्दी में हुआ जिसको सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मुक्तकंठ से प्रषंसा की । अटल जी की यह विषेशता रही है कि वे संसद व संसद के बाहर हिन्दी में ही भाशण देने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते हैं । जिस समय चीन ने भारत पर हमला किया था तो अटल जी ने कहा था कि इस समय हमें आपसी भेद भाव को भुल जाना चाहिए और एकजुट होकर चीन के हमले का विरोध करना चाहिए, ऐसी भारतीयता उनमें कुट-कुट कर भरी हुयी है । वाजपेयी जी काफी पुस्तम प्रेम रहे हैं । आपातकाल में जब 26 जुन 1975 को बैंगलोर की जेल में उन्हें बन्द कर दिया गया था तब वे जेल में भी पुस्तक पढ़ते थे व कवितायें लिखा करते थे । आपातकाल के पश्चात जब 1977 में नई सरकार बनी तब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तब उन्हें विदेष मंत्री बनाया गया था । विषेश मंत्री के रूप में अटल जी ने संयुक्त राश्ट्र संघ में राश्ट्रभाशा हिन्दी में भाशण दिया। राश्ट्रसंघ में हिन्दी में भाशण देने वाले अटल जी पहले व्यक्ति थे तथा उन्होने संसार को बता दिया कि भारत की राश्ट्रभाशा हिन्दी है । 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री बने । इसके बाद वे पुनः दो बार प्रधानमंत्री पद की षपथ ली । ऐसे महान राजनीतिज्ञ से भारत काफी गौरवान्वित है । इस अवसर पर पष्चिम सिंहभूम जिला के वरिश्ठ नेता अषोक शाड़ंगी, जिला परिशद् सदस्य रतन लाल बोदरा, संजय कुमार मिश्रा, नगर अध्यक्ष अषोक दास, राजु प्रसाद कसेरा, अष्वनी प्रमाणिक, संजय कुमार पासवान, सुरेन्द्र कसेरा, सुरज कुमार गुप्ता, मोहन साव, सुबोध पोद्दार, सुरेष कुमार साव, रूपेष कुमार साव, राकेष साह सहित काफी संख्या में भाजपा के नेतागण व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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