Girish Pankaj
गिरीश पंकज
सम्पादकीय सलाहकार
Arun Kumar Jha
अरुण कुमार झा
प्रधान संपादक
Rajiv Anand
राजीव आनन्द
संपादक
Vinay Kumar Mishra
विनय कुमार मिश्र
संपादन सहयोगी
• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

पत्रकार सुरक्षित होंगे तभी प्रेस की आजादी सुरक्षित रहेगी : डॉ. नंदकिशोर त्रिखा


संजीव कुमार सिन्हा


”प्रेस की आजादी सुरक्षित रखनी है तो पत्रकार सुरक्षित रहना चाहिए।” यह बात गत 22 नवंबर को नई दिल्लीस में आयोजित एक संगोष्ठी् में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के पूर्व राष्ट्रीय अध्यईक्ष डॉ. नंदकिशोर त्रिखा ने कही। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली् जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने किया था और विषय था- ‘पत्रकार सुरक्षा अधिनियम और मीडिया आयोग की जरूरत।’

पत्रकार संघ दिल्ली के सदस्य

  पत्रकार संघ दिल्ली के सदस्य

अपने संबो‍धन में डॉ. त्रिखा ने पत्रकार और पत्रकारिता के गौरवपूर्ण इतिहास पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्हों ने मीडिया के वर्तमान परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि आज जितनी मीडिया की दयनीय और पत्रकारों की असहाय स्थिति है, ऐसी पूर्व में नहीं रही। संपादक संस्थात की साख गिरी है। पत्रकार आजादी खो चुका है और वहीं, मालिक मजबूत हो रहा है।
उन्होंरने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि पत्रकारों पर जानलेवा हमले बढ़ते जा रहे हैं। यह पत्रकार ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी खतरे की घंटी है क्यों कि पत्रकार समाज के लिए काम करता है।
डॉ. त्रिखा ने तीसरे प्रेस आयोग के गठन पर बल देते हुए कहा कि 1952 में पहला प्रेस आयोग बना और आपातकाल के बाद दूसरा। तब से स्थिति काफी बदली है। प्रिंट व रेडियो के साथ-साथ इलेक्ट्रॉ निक और वेबमीडिया का विस्ताथर हुआ है। अब फिर से इन सभी मीडिया माध्य मों की स्थिति पर विचार करना होगा।
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्सा के अध्य्क्ष श्री रासबिहारी ने कहा कि आज समाज में पत्रकार सबसे शोषित है। पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं और जिस तरह से अखबारों और टीवी चैनलों में पत्रकारों की छंटनी हो रही है, उससे पत्रकारों के भविष्यब पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंरने कहा कि पत्रकार सुरक्षा अधिनियम, मीडिया आयोग और मीडिया परिषद् की मांग को लेकर आगामी 7 दिसंबर को देशभर के पत्रकार संसद का घेराव करेंगे।
प्रेस एसोसिएशन के सचिव श्री मनोज वर्मा ने कहा कि उत्तकरप्रदेश, पं. बंगाल, दिल्लीि जैसे अनेक राज्यों में पत्रकारों का शोषण और उत्पीदड़न किया जा रहा है। यह दुर्भाग्य,पूर्ण है। पत्रकार नहीं बचेगा तो लोकतंत्र नहीं बचेगा। आपातकाल में कोशिश की गई थी पत्रकारों को दबाने की। एनयूजे ने तब संघर्ष किया। हम लंबे समय से पत्रकार सुरक्षा अधिनियम की मांग कर रहे हैं। हम बहुत मांग कर चुके, अब आंदोलन ही रास्ताक है।
दिल्लीत जर्नलिस्ट्सं एसोसिएशन के अध्य‍क्ष श्री अनिल पांडेय ने राष्ट्री य एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्यी में पत्रकारों की स्थिति का अवलोकन करते हुए कहा कि आज पत्रकार अनेक तरह की चुनौतियां का सामना कर रहा है। उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं। बड़े पैमाने पर उनकी छंटनी हो रही है। इसलिए समग्र मीडिया का मूल्यांएकन करने के लिए तीसरा प्रेस आयोग अतिशीघ्र बनना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन दिल्ली जर्नलिस्ट्सं एसोसिएशन के कार्यकरिणी सदस्यघ श्री संजीव सिन्हाह ने किया। इस कार्यक्रम में एनयूजे के पूर्व उपाध्यसक्ष श्री सुभाष निगम, एनयूजे के कोषाध्यहक्ष श्री दधिबल यादव, एनयूजे राष्ट्रीकय कार्यकारिणी सदस्यर श्री मनोहर सिंह, डीजेए के कोषाध्य क्ष श्री राजेंद्र स्वाामी, डीजेए कार्यकारिणी सदस्य् श्रीमती सीमा किरण एवं सर्वश्री संजय सक्सेशना, राजकमल चौधरी, सगीर अहमद, वरिष्ठस टीवी पत्रकार श्री उमेश चतुर्वेदी, योजना पत्रिका के संपादक श्री ऋतेश पाठक, यथावत पत्रिका के एसोसिएट संपादक श्री ब्रजेश झा, अंकुर विजयवर्गीय (हिंदुस्ता न टाइम्सक), उमाशंकर मिश्र (अमर उजाला), पंकज प्रसून (न्यूरज नेशन), श्री कंत शरण (नेपालवन टीवी) सहित बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Youtube
Sensex

अन्य ख़बरें

Submit Your Article

Copyright © 2015. All rights reserved. Powered by Origin IT Solution