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धर्म,जाति से उपर उठकर मानवता के लिए काम करता हूँ – आजम अहमद

-महबूब आलम


आजम अहमद वर्तमान में झारखण्ड कौमी तहरीक नामक सामाजिक संगठन के अघ्यक्ष हैं ा इन्होनें इस बैनर तले राज्य के पिछडे और कमजोर वर्गो को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए सत्त संधर्शषील रहें हैं े ा छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रीय रहे आजम अहमद झारखण्ड अलग राज्य बनाने एंव डेमोसाईल नीति को पूरे राज्य में लागू करानें में इन्होने काफी संधर्श किया । अपनी राजनीति पृश्ठभूमि की चर्चा करते हुए आजम अहमद ने कहा कि वर्श 1989 ई 0 से छात्र आन्दोलन से जुडा । स्कूल की षिक्षा के समय से ही जय प्रकाष नारायण के आन्दोलन से प्रभावित रहा । बाद में काग्रेंस के वरिश्ठ नेता स्व ज्ञानरंजन के सम्पर्क में आने के बाद उनके नीति और राजनीति पहलू को काफी नजदीक से देखा और परखा और 1984 ई 0 में झाखण्ड मुक्ति मोर्चा के अलग राज्य की मांग को लेकर मैं भी उनके साथ पूरे उत्साह से अलग राज्य की लडाई लडी तथा हजारों युवाओ को इस संधर्श के लिए पे्ररित किया । राजनीति से जुडाव उन्हे विरासत में मिली पिता स्व कुर्बान उस्ताद और बडे भाईयों मो अलाउद्दीन अंसारी एंव सरफराज अंसारी जो काग्रेंस से जुडे थे उनकी प्रेरणा एंव सम्पर्क का नतीजा था कि राजनीति में आने की प्रेरणा मिली । मैट्कि उत्तीर्ण करने के पष्चात ही राजनीति में कूद पडा फिर समाजवादी पार्टी के राश्ट्ीय महासचिव स्व कपिल देव नारायण सिंह के व्यक्त्वि से प्रभावित हो कर इस पार्टी के अंगीकृत सर्वदलीय संधर्श समिति के बैनर तले राज्य के दबे कुचले और पिछडे लोगों के लिए संधर्श तेज कर दिया तथा झारखण्ड अलग राज्य गठन होने के बाद स्थानीयता जैसे मुद्दो को लेकर राज्य व्यापी आन्दोलन छेडा जिस पर जिला प्रषासन ने कई केस दर्ज कर दिये परन्तु राज्य में तृतीय और चतुर्थ वर्ग की बहाली से पूर्व स्थानीय नीति लागू किये जाने की मांग को लेकर आज भी उनका आन्दोलन जारी है । एक प्रष्न के उत्तर में आजम अहमद ने कहा कि राज्य के अल्पसंख्यको की समस्याओं के लिए वह आज भी कौमी तहरीक के बैनर तले सधर्शरत है । उन्होंनेे कहा कि राज्य के अल्पसख्यकों का हर राश्ट्ीय पार्टियो ने वोट बैक के रूप में इस्तेमाल किया है। अलग राज्य बनने के बाद भी इस राज्य में रह रहे अल्पसंख्यकों का पिछडापन दूर नहीं हुआ । राज्य में हजारों उर्दू षिक्षकों की बहाली, 15 सूत्री कार्यक्रम, झारखण्ड उर्दू अकादमी,सुन्नी वकफ बोर्ड, के साथ सरकारी कार्यालयों में उर्दू अनुवादक, सह अनुवादक , एंव उर्दू टंकक की बहाली का मामला पडा है । इन मसलों के अलावा वह राज्य के मजदूर, किसान, फुटपात दुकानदार, एंव विस्थापन एंव पलायन जैसे,मुद्दो को लेकर आन्दोलन कर रहें हैं । राज्य में लूटखसोट, भ्रश्टाचार, अपहरण, गिरती कानून व्यवस्था या राज्य में जब भी साप्रंदायिक तनाव या आपसी सौहार्द को बिगाडने का काम दिया गया वह इस कठिन परिस्थितियों में धर्म, जात से उपर उठकर इंसानियत के लिए काम किया । राज्य के संगठित एंव असंगठित मजदूरों के हक की बात हो या षोशण एंव नियुक्ति का मामला वह सदा मजदूरों के पक्ष में आवाज उठाई । इसके लिए पुलिस प्रषासन ने उन पर कई केस दर्ज कर दिये जिसका मुकदमा आज भी चल रहा है तथा उन्हें कई बार जेल की सलाखों के बीच भी कई रात गुजारनी पडी परन्तु आज भी उनका मनोबल कमजोर नहीं हुआ है वह आज भी जनता से जुडी समस्याओं को लेकर उसी रफतार से काम कर रहें हैं और मार्ग में आने वाली चुनौतियों का सामना कर रहें है ।

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