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जीवन- नदिया


योगेंद्रनाथ शर्मा अरुण

योगेंद्रनाथ शर्मा अरुण

 

पल-पल बहती जीवन-नदिया, सागर इसे बुलाए रे!
मिलने के उल्लास में पगली!, दौड़ी – दौड़ी जाए रे!!

जन्मों का नाता सागर से,
प्रीत को कैसे भूल सके?
बाधाओं से लोहा लेती,
नेह का झूला झूल सके!!

कोई बाधा रोक ना पाए, प्रेम – गीत नित गाए रे!
मिलने के उल्लास में पगली!, दौड़ी – दौड़ी जाए रे!!

प्रेम में डूबी जीवन-नदिया,
बस सागर की दीवानी है!
बाधाओं से जूझे हर पल,
प्रेम की यही निशानी है!!

रुकते कब हैं प्रेम – दीवाने?मंजिल यूं मिल जाए रे!
मिलने के उल्लास में पगली!, दौड़ी – दौड़ी जाए रे!!

नदिया का तो सारा जीवन,
बस देने में ही बीत गया!
जग की प्यास बुझाने में ही,
नदिया का जल रीत गया!!

फिर से जीवन पाने हेतु, ये सागर के घर जाए रे!
मिलने के उल्लास में पगली!, दौड़ी – दौड़ी जाए रे!!
————————————
डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा “अरुण”
पूर्व प्राचार्य,
74/3,न्यू नेहरु नगर,
रूडकी-247667

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