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गिरीश पंकज
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गुलदस्ता-ए-मुक्तकनामा का लोकार्पण


ज़िन्दगी बिक रही अब ईमान के बाज़ार में, और क्या-क्या बिकेगा ईमान के दरबार में,
संजय गिरि 
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नई दिल्ली , आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा कवि मनोज कामदेव की पुस्तक “गुलदस्ता-ए-मुक्तकनामा” के लोकार्पण उत्सव का सुन्दर आयोजन कल नोएडा के कार्ल हूबर स्कूल के सभागार में आयोजित किया गया! मंच की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव ने की ,विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध शायर गुलजार देहलवी एवं अतिथि जगदीश ठकराल ,डॉ. अशोक मधुप, डॉ. अरुण सागर और अनीस जी प्रमुख रहे !विशिष्ठ अतिथियों में प्रख्यात गज़लकार जनाब मलिकजादा “जाबेद” सुप्रसिद्ध साहित्यकार रामकिशोर उपाध्याय रहे ! मंच का सफल सञ्चालन प्रसिद्ध कवियत्री अल्पना सुहासिनी ने बहुत  शानदार एवं लाजबाब अंदाज़ में किया। सर्वप्रथम मंच पर उपस्थित सभी साहित्य् मनीषियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर माँ शारदे की आराधना की ! आगमन साहित्यिक समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री पवन जैन जी ने सभी का स्वागत पुष्पमाला पहना कर किया मनोज कामदेव ने अपने कुछ चुनिदा मुक्तक पढ़कर सुनाये जिस पर वहां उपस्थित सभी श्रोताओं ने खूब लुफ्त उठाया और ख़ुशी में झूम उठे –
1
जो नकाब बदलते हैं अपने हिसाब से,
पराये धोखा खाते हैं उनके लिबास से,
उनको भी पता है जमाना सब जानता है,
तभी तो पाले बदलते हैं अपने हिसाब से
2
ज़िन्दगी बिक रही अब ईमान के बाज़ार में,
और क्या-क्या बिकेगा ईमान के दरबार में,
आदमी से आदमी जल रहा कफ़न की तरह,
अब और क्या-2 जलेगा ईमान के बाज़ार में
3
सियासत के गलियारों में पसरी है उदासी,
कौन सी बाज़ी कब पलटे गहरी है खामोशी,
जिन पर कल तक था भरोसा वो हैं किधर,
अब शाम भी आई तो संग पसरी है उदासी

4
दीवार पर लटकी कोई शमशीर नहीं हूँ 
जो आके कैद कर ले ऐसी जंजीर नहीं हूँ 
मुझको भी अपना हुनर दिखाना आता है 
तभी तो मैं बिकने वाली जागीर  नहीं हूँ 
मुशायरा

                                                                                               

शब्दों से खेलने वाले शब्दों के जादूगर साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव ने मनोज कामदेव को अपना आशीर्वाद देते हुए कहा की पर्वत से कभी ठोकर नहीं खाते मनोज कामदेव जी का जन्मस्थान भी पर्वतों से तो यह भी बहुत विन्रम एवं सहनशील व्यक्तित्व के धनि हैं !पंडित सुरेश नीरव जी ने साहित्य का महत्व बताते हुए अनेको उदहारण दिए !

 कार्यक्रम में उपस्थित अनेको साहित्यकारों कवियों में दीपिका शर्मा , डॉ स्वीट अंजेल ,शीतल गोएल ,संगीता गोएल ,मनीषा जोशी ,शायर आदिल रशीद ,डॉ पुष्पा जोशी ट्रू मीडिया हिंदी पत्रिका के संपादक ओमप्रकाश प्रजापति,ट्रूमीडिया के पत्रकार कवि संजय कुमार गिरि,ट्रू मीडिया के विश्लेषक विष्णु दत्त शर्मा ,युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच के संयोजक ओम प्रकाश शुक्ल ,सुरेश पाल वर्मा ,त्रिभुवन कौल ,कीर्ति सिंह ,शुब्धा वाजपेयी ,नरेश मालिक ,दुर्गेश अवस्थी कवि राजेश मंदार शिव नरेश पांडये डॉ दीपक बामुला ,ममता लडिवाल ,ममता शर्मा सीमा गुप्ता विनोद कुमार वर्मा,आयुष चिराग,एस पी गौर,विशेषरूप से उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में मंचासीन अतिथियों व आयोजन में सहयोगी रहे विशिष्ट लोगों को स्मृति चिन्ह,शाल पुष्प माला पहनाकर सम्मानित किया गया।

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