Girish Pankaj
गिरीश पंकज
सम्पादकीय सलाहकार
Arun Kumar Jha
अरुण कुमार झा
प्रधान संपादक
Rajiv Anand
राजीव आनन्द
संपादक
Vinay Kumar Mishra
विनय कुमार मिश्र
संपादन सहयोगी
• गांधी जी की शहादत • 10 लाख डॉलर कीमत की है आलू की यह तस्वीर • बिल गेट्स से दोगुनी संपत्ति है पुतिन के पास जानिए इस रईस को • षष्ठम अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन (थाईलैण्ड) • भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर रांची के पहाड़ी मंदिर पर विश्व का सबसे ऊँचा राष्ट्रीय तिरंगा फहराकर इतिहास रचा • संगीता सिंह भावना की तीन कविताएँ • नमो पतंगबाजी की धूम • ट्रैफिक सुरक्षा सप्ताह का दूसरा दिन  • जबरा करे तो दिल्लगी, गबरू का गुनाह…!!

कुर्सी से उतरते ही सहिष्णु ?


-गिरीश पंकज


उस दिन भूतपूर्व मंत्री रामलाल जी मिल गये.
पहले सत्ता में थे, अब सड़क पर हैं. सड़क पर आते ही उनकी कमर कुछ झुक -से गयी थी . जबकि लोगों ने देखा है कि कल तक तन कर चलते थे . बड़ी ही नफासत से निकलते थे। इधर-उधर तो देखते ही नहीं थे. न देखते थे और न किसी की आवाज ही सुनते थे. सीधे मुंह किसी से बात भी नहीं करते थे. जब-तब लोगों को चमकाते ही रहा करते थे. उनकी अकड़ देख कर लोग कहा करते थे- ”ये ससुरा बड़ा असहिष्णु है भाई. मंत्री है तो क्या हुआ,?”
और एक दिन रामलाल जी की असहिष्णुता उन्हें ले डूबी. अक्सर ऐसे लोगों को ले डूबती है. तब उसके बाद उनके भीतर का मनुष्य जाग्रत होता है.
रामलाल जी के भीतर का भी मनुष्य यकायक जाग गया. वे आम लोगों को देख कर मुस्कराने लगे. इधर-उधर देख कर चलने लगे. राह चलते लोगों को आवाज़ दे- दे कर बुलाने लगे.
उनकी हरकत देख कर दो मित्र मज़े लेने लगे.
एक ने कहा- ”मतलब यह हुआ कि अब ये सहिष्णुता के पुजारी बन रहे हैं? सहिष्णु बनने के लिए क्या कुर्सी से नीचे उतारना ज़रूरी होता है?”
दूसरे ने कहा – ”हौ. ई तो बहुत ज़रूरी है भैया। और इसके बिना कोई चारा भी तो नहीं। एक बार नेता को कुर्सी से उतार भर दो, फिर देखो, ससुरा सहिष्णुता की बात करेगा, सदभावना का मन्त्र दोहाएगा. उसे सत्ता का अत्याचार नज़र आने लगेगा, पुलिस भी गंदी लगने लगेगी, उसे सरकार में बैठे लोगों के घपले-घोटाले दिखने लगेंगे. उसे गांधी याद आने लगेगा. कुल मिला कर वह मानवता का ‘महान’ पुजारी लगने लगेगा.”
दोस्तों को कानाफूसी करते देख रामलालजी मुस्कराते हुए बोल पड़े-”अरे कैसे हैं? क्या हाल है? घर में सब राजी-खुशी? ”
फिर कंधे पर हाथ रख कर बोले- ”देश इन दिनों संकट से जूझ रहा है. हम जब सत्ता में थे, तब कितना खुशहाल था. है कि नहीं?”
अब किसी के मुंह पर कोई कैसे बोल दे कि आप गलत कह रहे है. इसलिए एक सज्जन बोले- ”आपने सोचने वाली बात कह दी.”
दूसरा कुछ-कुछ पत्रकार टाइप का था, सो उसने कहा- ”आपके समय भी तो देश खुशहाल नहीं था, घोटाले होते थे, पुलिस प्रताड़ित करती थी. और मंत्री तो सीधे मुंह बात नहीं करते थे। आप भी. भयानक असहिष्णु थे सबके सब.”
दूसरे की बात सुनकर भूतपूर्व जी खामोश हो गए, फिर गंभीर स्वर में बोले- ”कुछ गलतियां तो हुयी थी, मगर आज तो हद हो रही है. देखिये, देश में क्या चल रहा है. असहिष्णुता दिखा रही है सरकार और सरकार के लोग.” पहले ने पूछा – ”कैसी असहिष्णुता, कुछ खुलासा करेंगे?”
रामलालजी बोले- ”अरे, देखो न, हमसे कह रहे हैं कि सरकारी बंगला खाली करो. लालबत्ती छिन गयी तो कोई बात नहीं, सरकारी कार तो मत छीनो. वो भी छीन ली. सारी सुविधाएं वापस हो गयीं। हाय-हाय, भूतपूर्व होने की इतना बड़ी सजा? और देखिये, अब हमारी आलोचना हो रही है. हमारे घपले उजागर किये जा रहे हैं. हमारी जाँच हो रही है? हमारी सरकार तो बनने दो, छठी का दूध याद दिला देंगे. ”
पहले ने हँसते हुए कहा- ”आप जब सत्ता में थे, तब आपने भी विरोधी नेताओं के खिलाफ अनेक नाटक किये थे. आप जो कुछ अभी झेल रहे हैं, तब विपक्ष झेला करता था . यह तो सत्ता का चरित्तर है.तब आप असहिष्णु थे , आज वे लोग हैं। हिसाब-किताब बरोबर। कुर्सी महाठगिनी हम जानी.”
रामलाल जी की बोलती बंद. मगर उन्हें बोलना तो था ही, सो बोले, ”ऐसा है भोले, हम चुप नहीं रहेंगे. क्योंकि अगर चुप रहे तो चर्चा में नहीं रहेंगे, चर्चा में न रहे, तो अगले चुनाव में हम कहीं के न रहेंगे. दुकानदारी जमी रहे, इसलिए सरकार की निंदा ज़रूरी है. राजनीति में विरोध न करो तो जनता भी गंभीरता से नहीं लेती इसलिए चीखना पड़ता है..”
इतना बोल कर सहिष्णुता के ‘महान’ पुजारी रामलालजी आगे बढ़ गए और बोले- ”मीडिया को बयान देने जा रहा हूँ कि ये सरकार जनविरोधी है, असहिष्णु है. अत्याचार का अंत हो कर रहेगा.”
उनकी बात सुनकर दोनों दोस्त मुस्कराने लगे और बोले- ”ज़रूर जाइए। सहिष्णुता का पाठ पढ़िए और पढ़ाइए.”

Comments are closed.

Youtube
Sensex

अन्य ख़बरें

Submit Your Article

Copyright © 2015. All rights reserved. Powered by Origin IT Solution